CBSE Class 10 Hindi (Course A) • Kritika Part-2 • Prose (Gadya)
पाठ का सारांश (Summary/Context):
'साना-साना हाथ जोड़ि...' (Meaning: I pray to you with folded hands) लेखिका मधु कांकरिया द्वारा रचित एक अत्यंत सुंदर 'यात्रा-वृत्तांत' (Travelogue) है। इस पाठ में लेखिका ने अपनी 'सिक्किम' (Sikkim - गंतोक से लेकर युमथांग और कटाओ तक) की यात्रा का सजीव और काव्यात्मक वर्णन किया है। यह यात्रा केवल प्रकृति के बाहरी सौंदर्य (बर्फ से ढके पहाड़, झरने, तीस्ता नदी) का दर्शन नहीं है, बल्कि यह एक 'दार्शनिक यात्रा' (Philosophical journey) भी है, जहाँ प्राकृत और आध्यात्म (Spirituality) आपस में मिल जाते हैं। पाठ में हिमालय की सुंदरता के साथ-साथ वहाँ के 'पहाड़ी लोगों के कठोर संघर्ष' (मज़दूर औरतें और बच्चे) को भी दिखाया गया है, जो 'सुंदरता में छिपे हुए दर्द' को उजागर करता है।
= अर्थ: गंतोक (गैंगटॉक) प्राकृतिक रूप से तो सुंदर है ही, लेकिन उसे वास्तव में सुंदर वहाँ के परिश्रमी (मेहनतकश) निवासियों ने बनाया है। यहाँ के स्त्री, पुरुष और बच्चे विपरीत परिस्थितियों (कठोर मौसम और पहाड़ी जीवन) में 'बादशाहों' (Kings) की तरह ग़ज़ब की इच्छाशक्ति (Willpower) और स्वाभिमान के साथ अपना काम करते हैं। वे रोते नहीं, बल्कि जीवन का आनंद लेते हैं।
= अर्थ: यह वाक्य लेखिका ने 'पत्थर तोड़ने वाली पहाड़ी मज़दूर औरतों' के बारे में कहा है। ये औरतें अपनी जान जोखिम में डालकर डायनामाइट और हथौड़ों से पहाड़ काटकर संकरे (तंग) रास्ते और सड़कें बनाती हैं (जिससे देश और पर्यटकों का आना-जाना सुगम होता है)। इस महान राष्ट्रीय व सामाजिक योगदान के बदले इन्हें नाममात्र की (बहुत कम) मज़दूरी मिलती है। यह देश की 'आम जनता' का सबसे बड़ा त्याग है।
प्रश्न 1: 'साना-साना हाथ जोड़ि...' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि प्राकृतिक सौंदर्य (Natural Beauty) का लेखिका के मन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: 'साना-साना हाथ जोड़ि' यात्रा-वृत्तांत में सिक्किम और हिमालय का प्राकृतिक सौंदर्य लेखिका को 'मंत्रमुग्ध' कर देता है। गंतोक के तारों भरे आसमान, 'सेवन सिस्टर्स' झरने के शीतल जल, और 'कटाओ' की ताज़ा-सफेद बर्फ को देखकर लेखिका को लगता है- मानो उसके मन की सारी बुराइयाँ, तामसिकता (Darkness/Evil thoughts) और वासनाएँ धुल गई हों। प्रकृति उसे इतनी विशाल और पवित्र लगती है कि वह 'बुद्ध' की तरह शांत हो जाना चाहती है। प्रकृति उसके अंदर एक दार्शनिक चिंतन और ईश्वर से जुड़ाव (Spirituality) पैदा करती है।
प्रश्न 2: गंतोक (गैंगटॉक) को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है?
उत्तर: 'मेहनतकश' का अर्थ है कठोर परिश्रम करने वाले और 'बादशाह' का अर्थ है स्वाभिमानी और मस्तमौला लोग। गंतोक एक पहाड़ी शहर है, जहाँ जीवन बहुत ही कठिन है। लेकिन फिर भी यहाँ के लोगों ने अपनी 'कठोर मेहनत और पसीने' से इस शहर को इतना सुंदर और व्यवस्थित बना दिया है। रात के समय वहाँ पहाड़ों पर टिमटिमाते तारे ऐसे लगते हैं मानो उल्टा आसमान बिछ गया हो। यहाँ के लोग हर मुश्किल का सामना बिना रोए, 'बादशाहों' की तरह शान और स्वाभिमान (Self-respect) के साथ करते हैं। इसीलिए लेखिका ने गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' कहा है।
प्रश्न 3: लेखिका ने 'कटाओ' को स्विट्ज़रलैंड से भी सुंदर (या भारत का स्विट्ज़रलैंड) क्यों माना है?
उत्तर: कटाओ सिक्किम का एक ऐसा बर्फीला पहाड़ी हिस्सा है जिसे अभी तक 'टूरिस्ट स्पॉट' (Tourist Map) में शामिल नहीं किया गया था। इस कारण से वहाँ प्रदूषण, दुकानें, कूड़ा-कचरा और लोगों की भारी भीड़ नहीं थी। कटाओ अपने एकदम प्राकृतिक (Virgin) और अदूषित रूप में मौजूद था। वहाँ गिरी हुई ताज़ा बर्फ इतनी मोती-सी सफेद और पवित्र लग रही थी कि लेखिका की मित्र (मणि-जो स्विट्ज़रलैंड घूम चुकी थीं) ने कहा कि "यह स्विट्ज़रलैंड से भी अधिक सुंदर है।" यह स्थान अत्यंत कोमल और पवित्र था।
प्रश्न 4: प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है?
उत्तर: हिमालय के अनंत (Endless) और विराट प्राकृतिक स्वरूप—जैसे बहती हुई तीस्ता नदी, ऊँचे देवदार के पेड़, पल-पल बदलता हुआ मौसम, और बर्फ से ढकी चोटियों को देखकर लेखिका को ऐसा लगा मानो वह ईश्वर के बहुत निकट (Close to God) आ गई हो। उसके मन का सारा अहंकार (Ego) समाप्त हो गया। उसे यह अनुभव हुआ कि मनुष्य इस विशाल प्रकृति के सामने कितना तुच्छ (छोटा) है। उसे शांति का अनुभव हुआ और उसके होंठों से नेपाली प्रार्थना 'साना-साना हाथ जोड़ि...' (मैं छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूँ) स्वयं ही निकल पड़ी।